शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

तुम पर कोई गीत लिखूँ क्या

तुम पर कोई गीत लिखूँ क्या
तुम सुगंध खिलते गुलाब सी
सुन्दर कोमल मधुर ख्वाब सी
मैं मरुथल का प्यासा हरिना
ललचाती मुझको सराब* सी
तुमको पाने की चाहत में
अब तक मचल रही हैं साँसें
तुम ही कह दो तुमको अपने
प्राणों का मनमीत लिखूँ क्या
तुम पर कोई गीत लिखूँ क्या
तुम शीतल हो चंदन वन सी
तुम निर्मल-जल, तुम उपवन सी
तुम चंदा सी और चाँदनी-
सी तुम हो, तुम मलय-पवन सी
नयन मूँद कर तुमको देखूँ
तुम मेरे मन पर छा जाती
कहो नयन-सुख क्या लिक्खूँ मैं
तुमको मन का प्रीत लिखूँ क्या
तुम पर कोई गीत लिखूँ क्या 
*मृग मरीचिका 

आशीष यादव

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