छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|
सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चिरई|
निक नाही लागे अब त घरवा अंगनवा,
तोहई के खोजे घूमि चारो और मनवा|
कवनी खतोका में लूकाय गईलू चिरई|
सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चिरई|
रोवेलिन भौजी देखा, रोवे महतारी|
बाबू जी आ भैया बईठी रोवेलन दुवारी|
सबसे पिरितिया छोडाय गईलू चिरई|
छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|
बाछी के कहाई अब सोना के कहाई|
इहे राग धईके देखा रोवत बानी मई|
नयना के लोरवा सुखी गईलू चिरई|
छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|
भौजी के बबुनी आ भैया के मोटकी|
प्यार से बोलावें कहिके बाबू जी ऐ छोटकी|
काहे कुलही नमवा भूलाय गईलू चीरई|
सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चीरई|
Ashish yadav