शुक्रवार, 13 मई 2011

छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|

छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|

सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चिरई|

निक नाही लागे अब घरवा अंगनवा,

तोहई के खोजे घूमि चारो और मनवा|

कवनी खतोका में लूकाय गईलू चिरई|

सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चिरई|

रोवेलिन भौजी देखा, रोवे महतारी|

बाबू जी भैया बईठी रोवेलन दुवारी|

सबसे पिरितिया छोडाय गईलू चिरई|

छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|

बाछी के कहाई अब सोना के कहाई|

इहे राग धईके देखा रोवत बानी मई|

नयना के लोरवा सुखी गईलू चिरई|

छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई|

भौजी के बबुनी भैया के मोटकी|

प्यार से बोलावें कहिके बाबू जी छोटकी|

काहे कुलही नमवा भूलाय गईलू चीरई|

सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चीरई|

Ashish yadav