शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

याद तुम्हारी

याद तुम्हारी क्या बतलाऊँ
कैसे कैसे आ रही है

चलने का अंदाज़ ठुमक कर
मचल-मचल कर और चहक कर
हाथों को लहरा-लहरा कर
अदा-अदा से और विहँस कर

तेरी सुंदर-सुंदर बातें
मन हर्षित है गाते-गाते
मैं कब से आवाज दे रहा
आ जाते हँसते-मुस्काते

तेरे गालों वाले डिम्पल
याद आते हैं मुझको पल-पल
मिसरी में पागे होठों के

नाज़ुक चुम्बन कोमल-कोमल

एक छवि मुस्कान बटोरे
मुझको अपने परितः घेरे
सुंदर सुखद समीर बहाती
बदली बन कर छा रही है

याद तुम्हारी क्या बतलाऊँ
कैसे कैसे आ रही है 


आशीष यादव

गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

अधूरी जिंदगी को तूने आके कर दिया पूरा

अधूरी जिंदगी को तूने आके कर दिया पूरा 
बहुत कुछ था मेरी जानाँ, मगर मैं था अधूरा, हाँ अधूरा 
अधूरी जिंदगी को तूने आके कर दिया पूरा 

भटकता मरुथलों में तरुवरों की चाह मन में थी 
सफर में था मगर एक हमसफर की चाह मन में थी 
अनुकृति बन रही थी, मिट रही थी, रात दिन मन में 
मुहब्बत तक पहुंचने की असीमित चाह मन में थी 

अधूरा दिल, अधूरा ख़्वाब, अरमां था अधूरा, हाँ अधूरा 
अधूरी जिंदगी को तूने आके कर दिया पूरा