स्कूटर के व्हील सा, समय घूमता आज
जाति- धरम के फेर में, अब मत फँसे समाज
निरखि कृष्ण आनंद लो, और न देखो अंक
आना- जाना एक सा, क्या राजा क्या रंक
ले कान्हा को गोद में, करे समीना प्यार
सबको जोड़े धर्म निज, इंसानी हो यार
जो पहुंचा दे लक्ष्य तक, क्या महमूद महेश
सबका मांझी एक है, अलग- अलग बस वेश
मानवता का पथ गहें, और धरें इक रंग
काशी- काबा में रहें, ईश- खुदा इक संग