मंगलवार, 31 मार्च 2026

चल मन अब गोकुल के धाम

 चल मन अब गोकुल के धाम 

अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम 

कि चल मन अब……………………….


कटि करधनी शीश पर चोटी 

मोर पंख सँग शोभित होती 

धूलि भरे घुटनों बल चलते 

यह छवि अति अभिराम 

कि चल मन अब……………………….


कबहुँ दूध-दधि-माखन खाते 

कबहुँ ग्वाल सँग गाय चराते 

कबहुँ अधर पर धर के मुरलिया 

सुर छेड़ें अविराम 

कि चल मन अब……………………….


उनका (प्रभु का) बाल रूप मन भाता 

इन रूपों से हृदय जुड़ाता 

मोहन इन रूपों में कीजै 

मम नैनन विश्राम 

कि चल मन अब……………………….


कान्हा मोहन किशन कन्हैया 

नंदलाल हे रास रचैया 

विनती है मेरे होठों पर 

हो बस तेरा नाम 

कि चल मन अब……………………….



आशीष यादव (कवि एवं गीतकार) 

बुधवार, 11 मार्च 2026

वो मेरी है लेकिन उस पर रत्ती भर अधिकार नहीं है

 एक बढ़िया सी नाव समंदर में है पर पतवार नहीं है 

मेरी ही छुट्टी पर मेरा रत्ती भर अधिकार नहीं है 


साहब जी की संडे, GH को ऑफिस की बंदी है 

तुम क्या जानो, अपनी खातिर हफ्ते में इतवार नहीं है 


हम छुट्टी मांगें तो साहब धमकी देकर कहते हैं 

छुट्टी वैलफेयर है सुन लो, यह कोई अधिकार नहीं है 


उनकी चाहत, चौबीस घंटे उनको लोग सलामी ठोकें 

लेकिन उनका इसके लायक बिल्कुल भी व्यवहार नहीं है 


सबके खातिर ईद दिवाली होली क्रिसमस कितने हैं 

एक हम हैं कि अपने खातिर कौई भी त्यौहार नहीं है 


अपना घर है, घर में बीबी बच्चे हैं, मां बापू हैं 

लेकिन सच पूछो तो अपना कोई भी घर बार नहीं है 


आशीष यादव