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ये तुम्हारा तसव्वुर हसीं जानेमन
एक पल को भी दिल से निकलता नहीं
पहले जैसे भी हम जी लिए हैं मगर
जीवन अब तेरे बिन देखो चलता नहीं
तेरी भौंहें की जैसे कटारी कोई
ये पलक इस फलक से भी अच्छे बने
बीच में इक समंदर समेटे हुए
माहताबी सरीखे ये नैना बने
ये खुमारी तुम्हारी है ऐसी चढ़ी,
लाख सम्हालूं ये दिल सम्हलता नहीं
ये तुम्हारा तसव्वुर हसीं जानेमन
एक पल को भी दिल से निकलता नहीं
फूल हो बेल हो या चहकती कली
नर्म दूबों का सुंदर गलीचा हो तुम
ये गुलाबी नयन ये महक संदली
हुस्न का इक मुसलसल बगीचा हो तुम
तेरे पहलू में रहने की जिद पे अड़ा,
लाख बहलाऊं ये दिल बहलता नहीं
ये तुम्हारा तसव्वुर हसीं जानेमन
एक पल को भी दिल से निकलता नहीं
होंठ ऐसे की जैसे हो प्याला कोई
ये छलकती नशीली गुलाबी सुरा
तुम नज़ाकत के प्याले में भर के इन्हे
तृप्त कर दो मुझे यूं पिला दो जरा
मस्त होकर तुम्हारे नशे में सनम
यूं चलूं कि शराबी हो चलता कहीं
ये तुम्हारा तसव्वुर हसीं जानेमन
एक पल को भी दिल से निकलता नहीं