
है जीवों को उपहार नयन,
औ' जीने के आधार नयन।
जो इन्द्रियों मे सर्वश्रेष्ठ
हैं गहरे पारावार नयन।
ये नयन आमन्त्रण देते हैं,
ये तिरस्कार भी करते हैं|
घृणित कर्म से घृणा, नेक
कर्मों से प्यार भी करते हैं।
नयनों मे है जलधार कि जो
पूरा संसार बहा डाले
यदि रौद्र नयन खुल जाये तो
सारी सृष्टि ही जला डाले।
ये प्रात शाम के रक्त सूर्य,
जैसे ठण्डक पहुँचाते है।
बन श्वेत शान्ति के चिह्न किन्तु,
दोपहरी रवि बन जाते हैं।

नयनों मे बाल्य छलकता है,
औ' नयनों मे तरुणाई भी।
ऊँचाई हिमगिरि की होती,
औ' प्राशान्तिक गहराई भी।
आशीष यादव
