शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

तुमने उसकी याद दिला दी

जाने अनजाने में कितनी
जिसे सोचते रातें काटीं
लम्हों-लम्हों में किश्तों में
जिनको अपनी साँसें बाटीं
कभी अचानक कभी चाहकर
जिसे ख़यालों में लाता था
और महकती मुस्कानों पर
सौ-सौ बार लुटा जाता था 
उसकी बोली बोल हृदय में
तुमने जैसे आग लगा दी
तुमने उसकी याद दिला दी

अँधियारी रजनी में खिलकर
चम-चम करने लगते तारे
इक चंदा के आ जाने से
फ़ीके पड़ने लगते सारे
शीतल शांत सजीवन नभ में
रजत चाँदनी फैलाता था
तम-गम में भी मेघ-लटों को
खिसकाता औ' मुस्काता था 
यादों पर आवरित घटा को
तुमने जैसे एक हवा दी
तुमने उसकी याद दिला दी 

आशीष यादव

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