वो कौन है जिसकी याद सताती है हमें|
न जाने किस तरफ ये रोज बुलाती है हमें||
खोजता हूँ मै उसे मिलती नहीं वो मुझको|
रात को लेकिन चुपके से जगाती है हमें||
कहीं मिले जो कभी मुझसे साफ़ कह दूँ मैं|
की कौन है और ऐसे सताती है हमें||
देर तक तन्हा बैठ कर के यूँ ही सोचते हैं|
फिर याद उसकी जमीं महफ़िल में लाती है हमें||
फूल के जैसे खिल के वो मेरे सिने में|
साथ हूँ इसका एहसास कराती है हमें||
एक अनजान सहारा सी बन गयी है वो|
अश्क जब आँखों में आये तो हसाती है हमें||
दूर होती नहीं मुझसे एक पल खातिर|
हर घडी बन के हवा छूकर जाती है हमें||
न जाने किस तरफ ये रोज बुलाती है हमें|
वो कौन है जिसकी याद सताती है हमें||