जिनिगी भर बस पाप कमइला
कइसे करबा गंगा पार
जुलुम सहे के आदत सभके
के थामी हाथे हथियार
केहू नाही बनी सहाई
बुझबा जब खुद के लाचार
काम न करबा घिसुआ जइसे
कहबा गंदा हव संसार
गैर क बिटिया बहू निहारल
हवे डुबावल धरम अपार
जइसन करबा ओइसन भरबा
करनी हव फल कै आधार
पढ़ल कुबुद्धी के समझावल
भीत से फोरल हवे कपार
आशीष यादव
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