जय व पराजय में देती जो सोहबत|
खुदा की है वो दस्तकारी मोहब्बत||
यही पंथ है नेक शान्ती का केवल|
मानवता को है सवांरी मोहब्बत||
मिल जुल के जो हमको रहना सिखाती|
बनी आज शिक्षक हमारी मोहब्बत||
मंजिल तक पहुचाये हमराह के संग|
इक सूत में बांधें प्यारी मोहब्बत||
बनिहारी कैसे हो सकती है इसमें|
किसी की नहीं काश्तकारी मोहब्बत||
नहीं तुम बचोगे नहीं हम बचेंगे|
अगर रो पड़ी जो लाचारी मोहब्बत||
संकल्प लें, एक तिल ना घटे ये|
हमारी मोहब्बत, तुम्हारी मोहब्बत||
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