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जिंदादिली से जब वो किसानी में आएगा
खाने का लुत्फ़ दाल-मखानी में आएगा
पाले कभी न तुमने मवेशी तो क्या पता
गायों को स्वाद कौन से सानी में आएगा
किलकारियां दालान में गूँजेगीं जिस घड़ी
"बचपन का दौर फिर से जवानी में आएगा"
ठाकुर से जा मिले हैं कथाकार आजकल
होरी कहाँ किसी की कहानी में आएगा
ये क्या कि तूने पार की सूखी हुई नदी
असली हुनर नदी की रवानी में आएगा
माँ भारती के वास्ते कुरबाँ जो हो गए
शेरों का अक्स उनकी निशानी में आएगा
आशीष यादव
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