सोमवार, 24 अगस्त 2020

ये ज़िंदगी का हसीन लमहा

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ये ज़िंदगी का हसीन लमहा

गुजर गया फिर तो क्या करोगी
जो जिंदगी के इधर खड़ा है

उधर गया फिर तो क्या करोगी

तुम्हें सँवरने का हक दिया है

वो कोई पत्थर का तो नहीं है
लगाये फिरती हो जिसको ठोकर

बिखर गया फिर तो क्या करोगी

कि जिनकी शाखों पे तो गुमां है

मगर उन्हीं की जड़ों से नफरत
वो आँधियों में उखड़ जड़ों से

शज़र गया फिर तो क्या करोगी

जिसे अनायास कोसती हो

छिपाए बैठा है पीर सारी
तुम्हारी नज़रों से गिर के आखिर

वो मर गया फिर तो क्या करोगी

किवाड़ दिल के लगा रखी हो

नज़र की खिड़की खुली हुई है
कोई निग़ाहों से सीधे दिल में

उतर गया फिर तो क्या करोगी

तू जिसकी उल्फ़त में जी रही है

कुछ उसकी नीयत भली नहीं है
वो खा के कसमें दिखा के सपने

मुकर गया फिर तो क्या करोगी

आशीष यादव

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