रविवार, 29 जनवरी 2023

गज़ल: कोई मिलता नहीं दोस्ती के लिए

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कुछ ने हामी भरी तीरगी के लिए 

कुछ जले शौक़ से रौशनी के लिए 


ख़ुद से मिलने की चाहत ने मुझ से कहा 

आईए बैठिए दो घड़ी के लिए  


मज़हबों का ये खेला ख़तरनाक है

इसमें कोई नहीं है किसी के लिए 


मैंने देखा नहीं कोई भी देवता

(कौन अल्लाह भगवान या देवता) 

माँ मिली है मुझे बंदगी के लिए 


कितने लाचार हो मुफ़लिसी ने कहा 

कोई मिलता नहीं दोस्ती के लिए


हम लिखें हुस्न पर? हुंह! अजी छोड़िए 

हैं ज़मीन और भी शाइरी के लिए 


आशीष यादव 


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