शुक्रवार, 20 जनवरी 2023

गज़ल : पत्थरों पर चल रहा हूँ

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पत्थरों पर चल रहा हूँ

रास्तों को छल रहा हूँ 1


लग रहा हूँ आज मीठा

सब्र का मैं फल रहा हूँ 2


कर दिया उनको पवित्तर 

यार गंगा जल रहा हूँ 3 


अब नहीं ख्वाहिश किसी की

हाँ कभी बेकल रहा हूँ 4


आज इतनी गाड़ियाँ है

मैं कभी पैदल रहा हूँ 5


याद आऊँ, मुस्कुरा दो 

वह तुम्हारा कल रहा हूँ 6


मैं डुबोया हूँ खुद ही को

स्वयं का दलदल रहा हूँ 7


चल रहा हूँ चाल अपनी

दुश्मनों को खल रहा हूँ 8 


कर रहे परदा मुझी से 

वो कि जिनका कल रहा हूँ 9 


योगचारी हूँ, कभी पर

हुस्न पर पागल रहा हूँ 10 


हो गया खुद बेसहारा

जो कभी संबल रहा हूँ 11 


आशीष यादव 

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