इसकी ग्रंथी उसकी गीता फिर कुरान और वेद करेंगें
पहले मजहब मे बांटेंगें फिर वर्णों में भेद करेंगें
इनके बहकावे मे आकर आदमियत को भूल गए तो
फिर तो वही तुम्हारे वंशज पुश्तों-पुश्तों खेद करेंगें
नफरत की फसलें बोएँगे दूषित गाँव समाज करेंगें
जोड़ तोड़ करने वाले, बहकाने वाले काज करेंगें
जब तक एक रहोगे तब तक बाल नहीं बांका होगा
टूट गए तो सारे वहशी मिलकर तुमपर राज करेंगें
आशीष यादव
बहुत सुंदर बातें कही हैं इस रचना के माध्यम से
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