122 2122 2122 2122 2
तेरी तस्वीर होठों से लगा लूँ, जो इजाजत हो।
उसे आगोश में लूँ, चूम डालूँ, जो इजाजत हो।
बहुत नायाब दौलत है तुम्हारे हुस्न की दौलत
तुम्हारा हुस्न तुमसे ही चुरा लूँ जो इजाजत हो ।
नशीले नैन लाली होंठ की यूँ मुझ पे छाई है
इन्हें मैं जाम समझूँ पी लूँ पा लूँ जो इजाजत हो।
वही सुंदर तरासा जिस्म जो एक बार देखा था
उसे फिर यार नैनों में बसा लूँ जो इजाजत हो।
कई नगमे तुम्हारी याद में लिक्खा किया मैंने
उन्हें इक बार स्वर दूँ यार गा लूँ जो इजाजत हो।
आशीष यादव
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें