शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021

सच्चाई के चोले से

सच्चाई के चोले से मैंने खुद को आजाद किया 

तब जाकर के बना मंतरी औ' खुद को आबाद किया


किये छिनैती जित्ती बारी उत्ती बारी धरै गए 

लिए सहारा राजनीति का ढंग नया ईजाद किया 


लड्डू बर्फी के झगड़े में दोनों गिरकर टूट गए 

"एक जरा सी जिद ने आखिर दोनों को बरबाद किया" 


हीरो बनिकै घूमि रहे थे हमौं हीरोइन कै साथै 

उनिकै बप्पा देख लिहिन फिर लातौं से संवाद किया 


हमरै बच्चों की अम्मा जब धइ कै हमकौ कूट दईं

अइसा होतै कोय न देखा, हमने दिल को शाद किया


हुनर छिछोरेपन का मुझ में ऐसे थोड़ी आया है 

लाते खाईं जेले काटीं तब खुद को उस्ताद किया


*आशीष यादव*

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