*हमारे गाँवों के प्राइवेट स्कूलों के गुरुओं को विशेष रूप से समर्पित*
मैंने सुनी नकल की बात एक गुरु जी से
पूछने लगा कि यह कैसी बेहयाई है
जिसको पढ़ाते आप पूरे साल मर मर
नकल कराने में शरम नहीं आई है
गुरू जी तो उलटे ही मुझ पर चढ़ गए
दिखता है बोले भ्रष्टाचार महँगाई है
यही तो कमाने का सुघर अवसर है जी
दो हजार प्रति माह भी कोई कमाई है
आशीष यादव
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