दीप जलाना
जहाँ दिखे अँधियार वहीं पर दीप जलाना
छाये खुशी अपार वहीं पर दीप जलाना
अपने मन के भीतर का जो पापी तम है
'अयं निजः' का भाव जहाँ पलता हरदम है
'वसुधा ही परिवार' जहाँ अंधेरे में है
सबसे पहले यार वहीं पर दीप जलाना
जहाँ दिखे अँधियार………………..
मुरझाए से होठों पर मुस्कान बिछाने
छोटी-छोटी खुशियों को सम्मान दिलाने
जिन दर दीप नहीं पहुँचे उन तक जाकर
रोशन करना द्वार वहीं पर दीप जलाना
जहाँ दिखे अँधियार………………..
मन में उत्सव धारे वह मुस्तैद खड़ा जो
देश सुरक्षा खातिर घर से दूर पड़ा जो
अपने देवो खातिर रखते दीप जहाँ पर
उनके खातिर यार वहीं पर दीप जलाना
जहाँ दिखे अँधियार………………..
आशीष यादव
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