गुरुवार, 4 नवंबर 2021

दीप जलाना

 दीप जलाना 


जहाँ दिखे अँधियार वहीं पर दीप जलाना 

छाये खुशी अपार वहीं पर दीप जलाना 


अपने मन के भीतर का जो पापी तम है 

'अयं निजः' का भाव जहाँ पलता हरदम है 

'वसुधा ही परिवार' जहाँ अंधेरे में है 

सबसे पहले यार वहीं पर दीप जलाना 

जहाँ दिखे अँधियार………………..


मुरझाए से होठों पर मुस्कान बिछाने 

छोटी-छोटी खुशियों को सम्मान दिलाने 

जिन दर दीप नहीं पहुँचे उन तक जाकर 

रोशन करना द्वार वहीं पर दीप जलाना 

जहाँ दिखे अँधियार………………..


मन में उत्सव धारे वह मुस्तैद खड़ा जो 

देश सुरक्षा खातिर घर से दूर पड़ा जो 

अपने देवो खातिर रखते दीप जहाँ पर 

उनके खातिर यार वहीं पर दीप जलाना 

जहाँ दिखे अँधियार……………….. 


आशीष यादव 

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