रविवार, 14 जून 2020

यह प्रणय निवेदित है तुमको

हे रूपसखी हे प्रियंवदे
हे हर्ष-प्रदा   हे मनोरमे
तुम रच-बस कर अंतर्मन में
अंतर्तम को   उजियार करो
यह प्रणय निवेदित है तुमको
स्वीकार करो,   साकार करो

अभिलाषी मन, अभिलाषा तुम
अभिलाषा   की  परिभाषा  तुम
नयनानांदित   -    नयनाभिराम
हो   नेह-नयन  की  भाषा   तुम
हे चंद्र-प्रभा हे कमल-मुखे
हे नित-नवीन हे सदा-सुखे
उद्गारित   होते   मनोभाव
इनको ढालो, आकार करो
यह प्रणय निवेदित है तुमको
स्वीकार करो   साकार करो

मैं तपता थल तुम हो छाया
मैं सदा दीन   तुम हो माया
जब-जब लिक्खा, तुमको लिक्खा
जब-जब गाया, तुमको गाया
हे सुमुखि-केशिनी-रूपवते
हे मधुर-भाषिता, मुग्ध-मते
इस विस्तारित आकर्षण का
कुछ तो स्नेहिल आधार करो
यह प्रणय निवेदित है तुमको
स्वीकार करो    साकार करो

आशीष यादव

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